Be an Exclusive App User and Unlock Premium Access! Download

Indians have over ₹2.2 लाख करोड़ Unclaimed Money – बैंक, शेयर और Insurance में पड़ा है आपका पैसा?

Talk to Our Sales Advisor

Submit accurate info for a quick callback from our sales team.

India Unclaimed Money: आपको जानकर शायद यकीन ना हो, लेकिन भारत में लाखों लोगों का पैसा ऐसा पड़ा हुआ है जिसे किसी ने सालों से claim ही नहीं किया। यह पैसा धीरे-धीरे accumulate होते-होते अब ₹2.2 लाख करोड़ से भी ज्यादा हो चुका है। सोचिए, यह amount कितनी बड़ी है — और इसमें कहीं ना कहीं आपका या आपके किसी जानने वाले का पैसा भी हो सकता है।

अक्सर लोग पैसा कमाने पर तो बहुत ध्यान देते हैं, लेकिन उसे track करने और manage करने में लापरवाही कर देते हैं। कोई policy ली, bank account खोला, shares खरीदे — लेकिन समय के साथ भूल गए। कई बार documents खो जाते हैं, या family को जानकारी नहीं होती, और यही छोटी-छोटी गलतियाँ आगे चलकर बड़े amount को unclaimed बना देती हैं।

सबसे interesting बात यह है कि यह पैसा कहीं lost नहीं हुआ है, बल्कि system के अंदर ही सुरक्षित पड़ा हुआ है। बस उसे claim करने वाला कोई नहीं आता। और जब तक कोई claim नहीं करता, यह पैसा ऐसे ही पड़ा रहता है।

इस blog में मैं आपको detail में समझाऊँगा कि यह Unclaimed Money क्या है, इतना ज्यादा पैसा क्यों unclaimed रह जाता है, और सबसे जरूरी — आप कैसे check कर सकते हैं कि कहीं आपका भी पैसा इसमें शामिल तो नहीं है।

Unclaimed Money होता क्या है?

अगर बिल्कुल आसान भाषा में समझाऊँ, तो unclaimed money का मतलब होता है — आपका ही पैसा, लेकिन जो लंबे समय तक आपने लिया ही नहीं या claim नहीं किया। यह पैसा कहीं खोता नहीं है, बल्कि system में सुरक्षित रहता है, बस उसका मालिक उसे लेने नहीं आता या उसे पता ही नहीं होता कि उसका पैसा वहाँ पड़ा है।

Image Credit: LinkedIn


मान लीजिए आपने कई साल पहले एक bank account खोला था और उसमें कुछ पैसा जमा किया था। शुरुआत में आपने उसे use किया, लेकिन धीरे-धीरे वह account आपके ध्यान से निकल गया। आपने use करना बंद कर दिया, transactions नहीं किए, और समय के साथ वह account inactive हो गया। कुछ साल और गुजरते हैं, और वही पैसा unclaimed category में चला जाता है। आपको लगता है कि वह पैसा खत्म हो गया, लेकिन असल में वह वहीं पड़ा रहता है।

ठीक इसी तरह insurance policies में भी अक्सर ऐसा होता है। कई बार policy mature हो जाती है, लेकिन policyholder उसे claim नहीं करता — या तो उसे याद नहीं रहता, या process को टाल देता है। कई cases में family को यह पता ही नहीं होता कि कोई policy थी। ऐसे में वह पूरा amount insurance company के पास ही पड़ा रह जाता है, बिना किसी के use में आए।

Shares और dividends के साथ भी यही situation देखने को मिलती है। अगर investor अपने contact details update नहीं करता, address बदल जाता है या communication break हो जाता है, तो company उससे connect नहीं कर पाती। ऐसे में dividends या shares claim नहीं हो पाते और धीरे-धीरे unclaimed में चले जाते हैं।

धीरे-धीरे जब ऐसे लाखों cases जमा होते जाते हैं, तो यह एक बहुत बड़ा amount बन जाता है। यह पैसा कहीं गायब नहीं होता, बल्कि system के अंदर ही पड़ा रहता है — लेकिन जब तक कोई उसे claim नहीं करता, तब तक वह किसी के काम नहीं आता। यही वजह है कि आज इतनी बड़ी amount unclaimed money के रूप में जमा हो चुकी है।

इतना सारा पैसा Unclaimed क्यों रह जाता है?

इसका सबसे बड़ा कारण है — awareness की कमी और financial discipline का ना होना। लोग investment तो कर लेते हैं, लेकिन उसका proper record maintain नहीं करते।

कई लोग अपने investments को track नहीं करते। न कोई list बनाते हैं, न family को बताते हैं। ऐसे में अगर कोई emergency हो जाए या policyholder ना रहे, तो family को यह पता ही नहीं चलता कि पैसा कहाँ-कहाँ लगा हुआ है।

इसके अलावा, लोग address, mobile number या email बदलते हैं, लेकिन institutions में update नहीं करते। इससे companies उनसे contact नहीं कर पातीं और information gap बन जाता है।

एक और बड़ी वजह है “delay”। लोग सोचते हैं कि बाद में claim कर लेंगे, लेकिन वह “बाद में” कभी आता ही नहीं। और धीरे-धीरे वह पैसा unclaimed बन जाता है।

As of December 2025 – ₹2.2 लाख करोड़ Unclaimed Assets का पूरा Breakdown

दिसंबर 2025 तक भारत में unclaimed financial assets का कुल amount ₹2.2 लाख करोड़ से भी ज्यादा हो चुका है। इसमें bank deposits, shares, insurance policies, provident fund और mutual funds जैसे कई sources शामिल हैं।

अगर हम इसका breakdown देखें, तो सबसे बड़ा हिस्सा equity shares और dividends का है, जो लगभग ₹89,004 करोड़ के आसपास है। यह amount 1,671 listed companies में पड़ा हुआ है और Investor Education and Protection Fund (IEPF) के तहत रखा गया है। सिर्फ Reliance Industries अकेले लगभग 15.6% हिस्सा रखती है, जो इस पूरे amount का बहुत बड़ा हिस्सा है।

इसके बाद आता है bank deposits, जो लगभग ₹97,545 करोड़ के आसपास है। इसमें public sector banks का हिस्सा सबसे ज्यादा है, करीब 80%। और अगर हम individual bank की बात करें, तो State Bank of India के पास ही लगभग ₹16,968 करोड़ unclaimed deposits के रूप में पड़े हुए हैं।

Insurance sector में भी बड़ी amount unclaimed रहती है। यह लगभग ₹20,062 करोड़ के आसपास है, जिसमें से बड़ा हिस्सा Life Insurance Corporation of India के पास है। LIC के पास ही लगभग ₹19,100 करोड़ का unclaimed amount report किया गया था।

Employees’ Provident Fund (EPF) में भी करीब ₹10,915 करोड़ पड़े हुए हैं, और हैरानी की बात यह है कि यह amount 31.87 लाख से ज्यादा dormant accounts में पड़ा हुआ है। इसके अलावा mutual funds में भी लगभग ₹3,452 करोड़ unclaimed dividends और redemption के रूप में पड़े हैं।

जब आप इन सभी को जोड़ते हैं, तो यह साफ दिखता है कि problem कितनी बड़ी है — और यह सिर्फ numbers नहीं हैं, बल्कि लोगों की मेहनत की कमाई है जो सही जगह तक नहीं पहुँच पाई।

आप कैसे check कर सकते हैं कि आपका पैसा कहीं फंसा हुआ है?

अब सबसे जरूरी सवाल यही आता है — आप कैसे पता करें कि आपका पैसा कहीं unclaimed तो नहीं पड़ा है? बहुत सारे लोग यही सोचते हैं कि “अगर मेरा पैसा होता तो मुझे पता होता”, लेकिन सच यह है कि कई बार छोटी-छोटी चीज़ें समय के साथ भूल जाती हैं और वही आगे चलकर unclaimed बन जाती हैं। इसलिए इसे casually लेने की बजाय थोड़ा समय निकालकर सही तरीके से check करना बहुत जरूरी है।

सबसे पहले आपको अपने पुराने financial records को याद करने और इकट्ठा करने की कोशिश करनी चाहिए। आपने कब कौन-सा bank account खोला था, किस company की policy ली थी, या कहाँ invest किया था — यह सब एक बार बैठकर लिखिए या note बनाइए। अगर documents नहीं भी मिलते, तो भी rough idea निकालना जरूरी है, क्योंकि वही आगे search करने में काम आता है। कई बार लोग 5–10 साल पुराने accounts या policies पूरी तरह भूल जाते हैं, और वही बाद में unclaimed category में चले जाते हैं।

Banks के मामले में अब process काफी आसान हो गया है। आप RBI के UDGAM portal पर जाकर अपने नाम से unclaimed deposits search कर सकते हैं। यह एक centralized platform है, जहाँ अलग-अलग banks की जानकारी एक जगह मिल जाती है। अगर आपके नाम से कोई dormant या unclaimed amount होगा, तो यहाँ उसका record दिखाई दे सकता है। थोड़ा patience के साथ search करना पड़ता है, लेकिन यह एक बहुत useful tool है।

Insurance के लिए भी आपको अलग-अलग companies की official websites पर जाकर check करना चाहिए। आजकल लगभग सभी insurance companies unclaimed amount search की सुविधा देती हैं। खासकर Life Insurance Corporation of India जैसी बड़ी companies में यह option आसानी से मिल जाता है। आपको policy number या basic details डालनी होती है, और अगर कोई amount pending है, तो वह दिख जाता है।

Shares और dividends के लिए आपको IEPF (Investor Education and Protection Fund) portal पर जाना होता है। यहाँ आप अपने नाम या company details के आधार पर search कर सकते हैं कि कहीं आपके नाम से कोई dividend, bonus या shares pending तो नहीं हैं। बहुत सारे investors को पता ही नहीं होता कि उनके पुराने investments का पैसा यहाँ पड़ा हुआ है।

अगर आप यह पूरा process थोड़े धैर्य और सही तरीके से करते हैं, तो बहुत ज्यादा chances हैं कि आपको कुछ ऐसा मिल जाए जिसकी आपको उम्मीद भी नहीं थी। कई लोगों को इस process के दौरान सालों पुराना पैसा वापस मिला है। इसलिए इसे ignore मत कीजिए — थोड़ा समय निकालिए, check कीजिए, और अपने पैसे को वापस लेने की कोशिश जरूर कीजिए।

Insurance Agents के लिए यह एक Opportunity क्यों है?

अगर आप एक insurance agent हैं, तो यह topic आपके लिए सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़ी practical opportunity भी है। आमतौर पर agents सिर्फ policy बेचने पर focus करते हैं, लेकिन जो agent client की hidden problems को समझकर उन्हें solve करता है, वही long-term में अलग पहचान बनाता है। Unclaimed money का यह topic भी उसी तरह का है — जहाँ आप बिना कुछ बेचे भी client की बड़ी मदद कर सकते हैं।

आप अपने clients से simple बातचीत के दौरान यह पूछ सकते हैं कि क्या उन्होंने कभी अपने पुराने accounts, policies या investments को check किया है। बहुत बार client को खुद नहीं पता होता कि उसका पैसा कहीं अटका हुआ है। आप उन्हें step-by-step guide कर सकते हैं — कहाँ check करना है, कैसे details भरनी हैं, और claim process कैसे करना है। जब आप उन्हें practically help करते हैं, तो उन्हें लगता है कि आप सिर्फ agent नहीं, बल्कि genuinely उनकी financial life में value add कर रहे हैं।

सबसे खास बात यह है कि आप client की ऐसी problem solve कर रहे होते हैं, जिसके बारे में उसे खुद भी जानकारी नहीं थी। जब किसी व्यक्ति को अचानक पता चलता है कि उसका कोई पुराना पैसा मिल सकता है, और उसमें आपने उसकी मदद की है, तो उसका trust level आपके ऊपर बहुत तेजी से बढ़ता है। यह trust किसी भी advertisement या marketing से नहीं बनता, यह सिर्फ real help से बनता है।

और जब यह trust बन जाता है, तो relation भी automatically strong हो जाता है। वह client सिर्फ एक policyholder नहीं रहता, बल्कि long-term connection बन जाता है। वह future में हर financial decision में आपको involve करता है, अपने friends और relatives को refer करता है, और आपके काम की openly तारीफ भी करता है।

यहीं पर एक smart agent और average agent में फर्क आता है। एक simple जानकारी, जिसे ज्यादातर लोग ignore कर देते हैं, उसी को अगर आप सही तरीके से use करते हैं, तो यह आपके लिए powerful business advantage बन सकती है — बिना extra investment के, सिर्फ सही approach के साथ।

आपके लिए चुने हुए पोस्ट:

Conclusion

₹2.2 लाख करोड़ का unclaimed money सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है कि financial awareness कितनी जरूरी है। अगर आप अपने investments को track नहीं करेंगे, records maintain नहीं करेंगे, और family को जानकारी नहीं देंगे, तो आपका पैसा भी future में unclaimed बन सकता है।

इसलिए आज ही action लें — अपने financial records check करें, update करें, और ensure करें कि आपका पैसा सही समय पर और सही व्यक्ति तक पहुँचे। क्योंकि पैसा कमाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है — उसे सही तरीके से संभालना और सही समय पर claim करना।

पॉपुलर पोस्ट आपके लिए:
  1. ULIP Policy कैसे खरीदे? Easy Language में पूरी जानकारी
  2. ULIP Plan की 10 सबसे ज़रूरी Terms – आसान हिंदी में पूरी जानकारी
  3. ULIP क्या है? (Unit Linked Insurance Plan) – पूरी जानकारी आसान हिंदी में
  4. Term Insurance vs Endowment Plan: सही लाइफ इंश्योरेंस चुनने की पूरी गाइड, फायदे, नुकसान और practical examples के साथ
  5. LIC Index Plus vs Mutual Fund SIP तुलना | 15 Years ₹20,000 Monthly Investment पर Returns, Tax Benefits और Life Cover
  6. Index Plus Vs Mutual Fund Comparison in Hindi – Index Plus के फायदे, टैक्स फ्री रिटर्न और Free Risk Cover
  7. LIC vs SIP vs FD – में सबसे अच्छा निवेश विकल्प कौन सा है? पूरी तुलना फायदे, रिस्क और गारंटी के आधार पर
  8. SIP क्या है? शुरुआती निवेशकों के लिए पूरी जानकारी – फायदे, नुकसान, रिटर्न और SIP कैसे शुरू करें आसान भाषा में
  9. SIP Kaise Kare in Hindi: SIP कैसे करें? - शुरुआती निवेशकों के लिए एक आसान और भरोसेमंद गाइड
  10. LIC vs Stock Market: क्या वाकई LIC में फायदा नहीं और शेयर बाजार में सब मुनाफा ही है? यहाँ समझे

75+ Join Kar Chuke — Aap Bhi Judiye
Insurance Selling Handbook

Insurance Selling Handbook

A practical eBook for LIC and insurance agents — packed with real sales dialogues, objection-handling scripts, and follow-up message templates to help you close more policies.

Buy on Amazon →

Suraj Barai

Suraj Barai is an IRDAI-authorised insurance advisor with LIC of India, and also an agent of Niva Bupa and SBI General Insurance. This blog is written based on his real-world experience in the insurance industry. He is also a content creator, Udemy instructor, website founder, and author of Kindle eBooks, sharing practical insights on insurance and finance.facebookinstagramtwitteryoutubetelegram

Post a Comment

Previous Post Next Post

Contact Form

Ad

x