आजकल बहुत से लोग ULIP Plan के बारे में सुनते हैं, लेकिन जब बात आती है NAV, Units, Fund Value जैसी terms की, तो confusion हो जाता है।
असल में ULIP को समझना मुश्किल नहीं है, बस उसकी basic terms clear होनी चाहिए।
इस blog में हम ULIP की 10 सबसे important terms को easy Hindi और practical examples के साथ समझेंगे, ताकि कोई भी व्यक्ति ULIP को सही तरीके से समझ सके।
1. NAV (Net Asset Value) क्या होता है?
NAV का पूरा नाम Net Asset Value होता है। ULIP plan में NAV का मतलब है fund की एक unit की वर्तमान कीमत। सरल शब्दों में कहें तो NAV यह बताती है कि आपके ULIP investment की एक unit आज के दिन कितनी कीमत की है।
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| Image credit: Tickertape |
जैसे शेयर बाजार में किसी कंपनी के शेयर का भाव रोज़ बदलता रहता है, वैसे ही ULIP fund की NAV भी हर working day बदलती रहती है। यह बदलाव market की स्थिति पर depend करता है। जब बाजार अच्छा perform करता है, तब NAV बढ़ती है और जब बाजार में गिरावट आती है, तब NAV कम हो जाती है।
NAV इस बात पर निर्भर करती है कि ULIP fund का पैसा कहाँ invest किया गया है। अगर fund equity market में invest है, तो NAV market के उतार-चढ़ाव के साथ ज़्यादा बदलती है। वहीं अगर fund debt market या balanced fund में है, तो NAV में उतार-चढ़ाव comparatively कम होता है।
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी ULIP fund की NAV ₹20 है, तो इसका मतलब है कि उस fund की 1 unit की value ₹20 है। जब future में यही NAV ₹25 या ₹30 हो जाती है, तो आपकी units की total value भी अपने आप बढ़ जाती है। इसी वजह से कहा जाता है कि NAV ही ULIP investment के profit या loss को तय करने वाला सबसे important factor होता है।
2. Units क्या होती हैं?
ULIP plan में आपका investment सीधे रुपये के रूप में नहीं दिखता, बल्कि उसे Units में convert कर दिया जाता है। जब भी आप premium जमा करते हैं, उस समय की NAV के आधार पर आपको कुछ units allocate की जाती हैं। यही units आपके investment का असली आधार होती हैं।
इसे आसान भाषा में समझें तो units आपके ULIP fund में हिस्सेदारी (share) की तरह होती हैं। जितना ज़्यादा premium invest होगा या जितनी कम NAV होगी, उतनी ज़्यादा units आपको मिलेंगी। और जितनी ज़्यादा units होंगी, future में NAV बढ़ने पर आपकी fund value उतनी ही ज़्यादा बनेगी।
उदाहरण के लिए, अगर आपने ₹10,000 invest किया और उस दिन fund की NAV ₹10 थी, तो आपको मिलेंगी:
10,000 ÷ 10 = 1000 Units
ये 1000 units आपके नाम की हो जाती हैं। आगे चलकर जब NAV बढ़कर ₹15 या ₹20 होती है, तो इन्हीं units की वजह से आपकी policy की value बढ़ती है।
इसलिए ULIP में सिर्फ NAV ही नहीं, बल्कि कितनी units मिली हैं, यह भी उतना ही ज़रूरी होता है। लंबे समय तक लगातार premium भरने से units जमा होती जाती हैं, और यही units future में wealth creation का base बनती हैं।
3. Fund Value क्या होती है?
Fund Value का मतलब होता है आपकी ULIP policy की वर्तमान (current) कुल कीमत। यानी अगर आज के दिन आपकी policy की value जाननी हो, तो वही amount आपकी fund value कहलाती है। यही value यह दिखाती है कि आपके investment की आज की स्थिति क्या है।
ULIP में fund value सीधे तौर पर आपके पास मौजूद units और current NAV पर depend करती है। इसे निकालने का एक बहुत simple formula होता है:
Fund Value = Units × Current NAV
मान लीजिए आपके पास 1000 units हैं और आज fund की NAV ₹15 है, तो आपकी fund value होगी ₹15,000। अगर कल NAV बढ़कर ₹18 हो जाती है, तो बिना कोई extra पैसा डाले आपकी fund value अपने आप बढ़कर ₹18,000 हो जाएगी।
Fund value समय के साथ बदलती रहती है, क्योंकि NAV रोज़ बदलती है। Market अच्छा perform करता है तो fund value बढ़ती है और market गिरता है तो fund value थोड़ी कम भी हो सकती है। इसलिए ULIP में short term उतार-चढ़ाव को देखकर घबराना नहीं चाहिए।
यही fund value future में partial withdrawal, policy maturity amount और long-term wealth creation का base बनती है। जितनी ज़्यादा units और जितनी बेहतर NAV growth, उतनी ही strong आपकी ULIP fund value बनती है।
4. Equity Fund क्या होता है?
Equity Fund वह ULIP fund होता है जिसमें आपका पैसा share market में invest किया जाता है। इस fund में investment बड़ी कंपनियों के shares, equity-linked instruments और market-based assets में होता है। इसी वजह से equity fund को high growth potential वाला fund माना जाता है।
Equity fund में return पूरी तरह market की performance पर depend करता है। जब share market अच्छा perform करता है, तो इस fund की NAV तेज़ी से बढ़ती है और आपकी fund value में अच्छा growth देखने को मिलता है। वहीं market गिरने पर NAV में गिरावट भी आ सकती है, इसलिए इसमें risk ज़्यादा होता है।
हालांकि यह risk ज़्यादातर short term के लिए होता है। अगर ULIP को long term (10–20 साल) के लिए रखा जाए, तो equity fund market के ups and downs को balance कर लेता है। यही कारण है कि long term में equity fund wealth creation का सबसे powerful option माना जाता है।
Equity fund खासतौर पर young investors, earning professionals और long-term goal वाले लोगों के लिए suitable होता है। सही समय और सही strategy के साथ equity fund, ULIP को सिर्फ insurance नहीं बल्कि strong investment tool भी बना देता है।
5. Debt Fund क्या होता है?
Debt Fund वह ULIP fund होता है जिसमें आपका पैसा safe और fixed income वाले instruments में invest किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से government bonds, treasury bills, corporate bonds और अन्य debt securities शामिल होती हैं। इस वजह से debt fund को low risk वाला fund माना जाता है।
Debt fund में market का उतार-चढ़ाव equity fund की तुलना में बहुत कम असर डालता है। इसलिए इस fund की NAV ज़्यादा stable रहती है और अचानक बड़ी गिरावट की संभावना कम होती है। जो लोग risk लेने से डरते हैं या अपनी पूंजी को सुरक्षित रखना चाहते हैं, उनके लिए debt fund एक अच्छा option होता है।
हालांकि debt fund में risk कम होता है, लेकिन return भी सीमित होता है। यह fund equity fund जितना high return नहीं देता, लेकिन steady और predictable growth देता है। इसलिए debt fund उन investors के लिए उपयुक्त है जो stability को growth से ज़्यादा importance देते हैं।
ULIP में debt fund का इस्तेमाल अक्सर risk balance करने के लिए किया जाता है। जैसे-जैसे policy holder की उम्र बढ़ती है या goal पास आता है, equity से debt fund में switch करके accumulated wealth को सुरक्षित किया जा सकता है।
6. Fund Switch क्या होता है?
Fund Switch ULIP plan की एक बहुत ही important और useful सुविधा होती है। इसका मतलब है कि आप अपने ULIP में invest किए गए पैसे को एक fund से दूसरे fund में shift कर सकते हैं, जैसे Equity Fund से Debt Fund या Debt Fund से Equity Fund।
इस feature का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप market की situation के हिसाब से अपनी investment strategy बदल सकते हैं। जब market तेज़ी में होता है, तब equity fund में रहकर ज़्यादा growth ली जा सकती है। वहीं जब market बहुत ज़्यादा risky लगता है, तब equity से debt fund में switch करके पैसे को सुरक्षित किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए, अगर share market काफ़ी ऊपर पहुँच चुका है और आपको future में गिरावट का डर है, तो आप equity fund से debt fund में switch कर सकते हैं। इसी तरह, जब market नीचे आ जाए, तब debt fund से equity fund में switch करके ज़्यादा units और बेहतर growth का मौका लिया जा सकता है।
अधिकतर ULIP plans में limited free fund switches दिए जाते हैं, ताकि policy holder बिना extra cost के सही समय पर decision ले सके। सही तरीके से किया गया fund switch ULIP को सिर्फ insurance नहीं, बल्कि एक smart investment tool बना देता है।
7. Policy Term क्या होता है?
Policy Term का मतलब होता है कि आपकी ULIP policy कितने साल तक active रहेगी। आसान भाषा में कहें तो यह वह पूरी अवधि होती है, जिसके लिए आपने ULIP plan लिया है। ULIP में policy term आमतौर पर 10 साल, 15 साल, 20 साल या 25 साल तक की होती है।
Policy term ULIP में बहुत important भूमिका निभाता है, क्योंकि ULIP पूरी तरह long-term investment पर आधारित होता है। जितना ज़्यादा लंबा policy term होगा, market को उतना ज़्यादा समय मिलेगा grow करने का, और आपके investment को compound होने का पूरा फायदा मिलेगा।
छोटे समय के लिए ULIP लेना सही नहीं माना जाता, क्योंकि market short term में unstable हो सकता है। लेकिन लंबी अवधि में market के उतार-चढ़ाव average out हो जाते हैं और return बेहतर बनता है। इसी वजह से experts हमेशा ULIP को long-term goals जैसे बच्चों की पढ़ाई, शादी या retirement के लिए recommend करते हैं।
इसलिए ULIP policy लेते समय policy term का चुनाव आपकी उम्र, income और financial goals को ध्यान में रखकर करना चाहिए। सही policy term चुनने से ULIP से मिलने वाला benefit काफी हद तक बढ़ सकता है।
8. Lock-in Period क्या होता है?
Lock-in Period का मतलब होता है वह minimum समय, जिसके दौरान आप अपनी ULIP policy से पूरा पैसा निकाल नहीं सकते। ULIP plans में यह lock-in period 5 साल का होता है। यानी policy शुरू होने के बाद पहले 5 साल तक fund को पूरी तरह withdraw करने की अनुमति नहीं होती।
इस lock-in period का मुख्य उद्देश्य investor को long-term investment के लिए discipline में रखना होता है। Market में short term उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, और अगर lock-in न हो तो कई लोग घबराकर policy बीच में ही बंद कर देते हैं। Lock-in period investor को ऐसा करने से रोकता है।
अगर किसी कारणवश policy holder 5 साल के अंदर premium देना बंद कर देता है, तो policy discontinue हो जाती है, लेकिन जमा किया गया पैसा discontinued policy fund में चला जाता है। यह पैसा 5 साल पूरे होने के बाद ही withdraw किया जा सकता है, साथ ही उस पर limited return मिलता है।
5 साल पूरे होने के बाद ULIP policy में partial withdrawal की सुविधा मिल जाती है। इसका मतलब है कि आप जरूरत पड़ने पर कुछ हिस्सा निकाल सकते हैं, जबकि बाकी पैसा invest होकर grow करता रहता है। यही lock-in period ULIP को एक मजबूत long-term wealth creation plan बनाता है।
9. Premium Allocation क्या होता है?
Premium Allocation का मतलब होता है कि आपके द्वारा दिया गया premium किस तरह से distribute किया जाता है। यानी आपके premium का कितना हिस्सा investment में जाएगा और कितना हिस्सा विभिन्न charges में कटेगा। ULIP में पूरा premium सीधे invest नहीं होता।
जब आप ULIP policy शुरू करते हैं, तो premium का एक हिस्सा policy administration, fund management और अन्य charges में चला जाता है। बचा हुआ amount fund में invest किया जाता है, जिसे NAV के अनुसार units में convert किया जाता है।
उदाहरण के लिए, अगर आपने ₹50,000 का premium दिया है और उसमें से ₹5,000 charges में कट गए, तो बाकी ₹45,000 amount fund में invest होगा। इसी ₹45,000 से आपको units मिलेंगी। इसलिए यह समझना जरूरी है कि आपका actual investment कितना हो रहा है।
जैसे-जैसे policy पुरानी होती जाती है, charges धीरे-धीरे कम होते जाते हैं और premium allocation बेहतर हो जाता है। लंबे समय में ULIP का फायदा यहीं से आता है, क्योंकि ज़्यादा पैसा invest होता है और market growth का पूरा लाभ मिलता है।
10. Mortality Charges क्या होते हैं?
Mortality Charges वह charges होते हैं जो ULIP policy में life insurance cover देने के लिए लिए जाते हैं। आसान शब्दों में कहें तो यही वह amount है, जिसकी वजह से ULIP में आपके परिवार को financial protection मिलती है।
ULIP सिर्फ investment नहीं है, बल्कि एक insurance plan भी है। अगर policy term के दौरान policy holder की मृत्यु हो जाती है, तो nominee को death benefit दिया जाता है। इसी benefit को provide करने के लिए insurance company mortality charges deduct करती है।
Mortality charges मुख्य रूप से policy holder की उम्र, sum assured और policy term पर depend करते हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, insurance risk भी बढ़ता है, इसलिए mortality charges भी धीरे-धीरे बढ़ते जाते हैं। हालांकि यह charges monthly या yearly basis पर fund value से adjust होते रहते हैं।
यही mortality charges ULIP को mutual fund से अलग बनाते हैं। ULIP में investment के साथ-साथ life cover भी मिलता है, जिससे यह plan long-term financial planning के लिए एक balanced और secure option बन जाता है।
Conclusion
ULIP plan को लेकर लोगों के मन में सबसे ज़्यादा confusion NAV, Units, Fund Value और Charges को लेकर होता है। लेकिन जब इन basic terms को आसान भाषा में समझ लिया जाए, तो ULIP कोई complicated product नहीं लगता। बल्कि यह एक ऐसा plan बन जाता है, जो insurance और investment दोनों का balance देता है।
NAV और Units यह तय करती हैं कि आपका investment market के साथ कैसे grow करेगा, जबकि Fund Value आपको हर समय यह दिखाती है कि आपकी policy की current स्थिति क्या है। Equity और Debt fund आपको risk और return के बीच सही balance बनाने में मदद करते हैं, और Fund Switch जैसी सुविधा ULIP को flexible बनाती है।
Policy Term और Lock-in Period यह सिखाते हैं कि ULIP एक long-term commitment है, न कि short-term profit का साधन। वहीं Premium Allocation और Mortality Charges यह clear करते हैं कि आपका पैसा कैसे manage होता है और आपको life insurance cover कैसे मिलता है।
अंत में यही कहा जा सकता है कि अगर ULIP को पूरा समझकर, long-term सोच के साथ लिया जाए, तो यह न सिर्फ आपके परिवार को सुरक्षा देता है, बल्कि समय के साथ wealth creation में भी एक मजबूत भूमिका निभा सकता है।
इसे पढ़ना ना भूलें - ULIP क्या है? (Unit Linked Insurance Plan) – पूरी जानकारी आसान हिंदी में
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