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ULIP vs Mutual Fund in Hindi: 9 जरूरी बातें जो निवेश से पहले जाननी चाहिए

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ULIP vs Mutual Fund in Hindi: आजकल पैसे को सही जगह लगाना हर किसी के लिए बहुत जरूरी हो गया है। सिर्फ बचत करना ही काफी नहीं है, बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि पैसा कैसे बढ़े और सुरक्षित रहे। ऐसे में ULIP और म्यूचुअल फंड के बीच बहुत लोग उलझ जाते हैं। कौन सा सही है? किससे ज्यादा फायदा मिलेगा? ये सवाल हर निवेशक के दिमाग में आते ही रहते है।

कई बार लोग सिर्फ return देखकर फैसला कर लेते हैं। जैसे कोई calculator या past data में 12–15% return दिखता है, तो लगे कि बस यही सही है। लेकिन असल में सिर्फ return देख कर निवेश करना गलत है। ULIP और म्यूचुअल फंड का मकसद अलग होता है, और इन्हें सही से समझना बहुत जरूरी है।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि ULIP और म्यूचुअल फंड में असली फर्क क्या है। साथ ही यह भी समझेंगे कि कौन किसके लिए सही है, इनके फायदे और नुकसान क्या हैं, और निवेश करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। अगर आप सोच-समझ कर निवेश करेंगे, तो लंबे समय में अच्छा और सुरक्षित रिजल्ट मिलेगा।

Image credit: Labour Law Advisor


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ULIP क्या है और यह कैसे काम करता है?

ULIP यानी Unit Linked Insurance Plan, एक ऐसा plan है जिसमें आपको निवेश और जीवन बीमा दोनों मिलते हैं। मतलब जो पैसा आप हर महीने या एकमुश्त देंगे, उसका एक हिस्सा आपके लिए life insurance cover में जाएगा और बाकी का पैसा अलग-अलग fund में invest होगा। Fund आपके risk और target के हिसाब से equity, debt या दोनों में लगाया जा सकता है।

ULIP का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह आपके परिवार को भी सुरक्षा देता है। अगर निवेशक के साथ कुछ अनहोनी हो जाती है, तो परिवार को बीमा राशि + fund value दोनों मिलती हैं। यानि पैसे का फायदा भी मिलेगा और सुरक्षा भी। यही वजह है कि ULIP सिर्फ निवेश का साधन नहीं, बल्कि एक smart financial planning tool भी है।

इसके अलावा ULIP में आप अपने निवेश को market के हिसाब से बदल सकते हैं। इसे fund switching कहते हैं। अगर आप चाहते हैं कि ज्यादा पैसा growth वाले fund में जाए या कम risk वाला fund चुनना है, तो आप आसानी से बदल सकते हैं। यह flexibility इसे और भी उपयोगी बनाती है।

शुरुआत में कुछ charges होते हैं, इसलिए पहले साल में fund value कम दिख सकती है। लेकिन समय के साथ और सही fund selection के साथ, ULIP लंबी अवधि में अच्छा return दे सकता है। बस ध्यान रहे कि इसे short-term investment की तरह न देखें। यह plan लंबी अवधि में disciplined निवेश और सुरक्षा दोनों देता है।

म्यूचुअल फंड क्या है और यह कैसे काम करता है?

म्यूचुअल फंड एक ऐसा investment option है जिसमें आपका पैसा पूरी तरह निवेश के लिए लगाया जाता है। इसमें कोई बीमा कवर नहीं होता, मतलब अगर निवेशक के साथ कुछ हो जाए, तो परिवार को सिर्फ fund value ही मिलेगी।

आप म्यूचुअल फंड में पैसा दो तरीके से डाल सकते हैं – SIP (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए मासिक निवेश या एकमुश्त (lump sum) निवेश करके। SIP का फायदा यह है कि छोटी-छोटी रकम से भी नियमित निवेश कर सकते हैं और market के उतार-चढ़ाव का असर कम होता है।

म्यूचुअल फंड का return पूरी तरह market performance पर depend करता है। यानी market अच्छा चला तो return ज्यादा मिलेगा, और market गिरा तो नुकसान भी हो सकता है। इसलिए इसमें निवेश करने से पहले यह समझना जरूरी है कि आप risk लेने में comfortable हैं या नहीं।

यह उन लोगों के लिए सबसे अच्छा है जिनके पास पहले से life insurance है और जो केवल अपनी संपत्ति बढ़ाना चाहते हैं। म्यूचुअल फंड में flexibility और growth का फायदा मिलता है, लेकिन इसमें सुरक्षा का कोई cover नहीं होता।

लोग अक्सर म्यूचुअल फंड के बारे में यह सोचते हैं कि जल्दी पैसा बढ़ जाएगा, लेकिन असली फायदा लंबी अवधि में ही मिलता है। इसलिए patience और discipline के साथ निवेश करना बहुत जरूरी है। Market के short-term उतार-चढ़ाव में घबराने की जरूरत नहीं है।

सिर्फ रिटर्न देखकर निवेश करना क्यों गलत है?

बहुत लोग यह सोचते हैं कि अगर किसी म्यूचुअल फंड या ULIP में 12–15% return दिख रहा है, तो बस वही सही है। कई बार लोग calculator या past performance देखकर excited हो जाते हैं और बिना समझे पैसा लगा देते हैं। लेकिन असली बात यह है कि सिर्फ return देखकर निवेश करना अक्सर नुकसानदेह साबित होता है।

म्यूचुअल फंड का return market पर depend करता है। यानी market गिरा तो return कम होगा, और market अच्छा चला तो बढ़ जाएगा। ULIP में भी शुरुआत के सालों में charges ज्यादा होते हैं, इसलिए fund value कम दिख सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि plan खराब है।

सिर्फ return देखने की आदत से लोग short-term सोच में फंस जाते हैं। सही तरीका यह है कि आप अपने goal, समय और risk लेने की क्षमता के हिसाब से ही निवेश करें। Long-term disciplined investment हमेशा बेहतर और सुरक्षित परिणाम देता है।

इसके अलावा, केवल high percentage देखकर निवेश करने से अक्सर panic selling या जल्दी withdrawal की आदत बन जाती है। इससे fund value कम हो सकती है और फायदा कम हो सकता है। इसलिए सोच-समझकर और समझदारी से ही निवेश करना चाहिए।

Mutual Fund calculator पर दिखे return पर भरोसा क्यों न करें?

आजकल निवेशक म्यूचुअल फंड लेने से पहले online calculators में अपना पैसा डालते हैं और excited हो जाते हैं कि “वाह, 12–15% return मिलेगा।” लेकिन यह सिर्फ अनुमान होता है। Calculator सिर्फ past data या assumed growth rate के आधार पर future return दिखाता है। असली market हर साल उतना तेजी से नहीं बढ़ता।

असल में, अगर market धीमा चलता है या गिरावट आती है, तो calculator में दिखा high return हकीकत में कम हो सकता है। यानी calculator के numbers सिर्फ एक idea देने के लिए हैं, guaranteed नहीं हैं।

इसलिए सिर्फ numbers देखकर पैसा लगाना बहुत risky होता है। निवेश हमेशा सोच-समझकर करना चाहिए और अपने goal, समय और risk capacity को ध्यान में रखना चाहिए।

Mutual Fund में patience और discipline सबसे जरूरी चीज़ है। Short-term में market गिर सकता है, लेकिन लंबी अवधि में सही योजना और नियमित निवेश से अच्छा फायदा मिल सकता है। इसलिए हमेशा calculator को guide की तरह देखें, तय करने का आधार नहीं।

ULIP को लेकर आम गलतफहमियां और डर

कई लोग ULIP के बारे में सुनते ही डर जाते हैं और सोचते हैं कि यह महंगा है या फायदा नहीं देगा। शुरुआत में कुछ charges ज्यादा होते हैं, इसलिए fund value पहले सालों में कम दिखती है। इससे लोग जल्दी निराश हो जाते हैं और plan छोड़ने का सोचते हैं।

कई बार लोग यह भी सोचते हैं कि ULIP सिर्फ निवेश का साधन है, लेकिन इसमें बीमा का benefit भी होता है। अगर निवेशक के साथ कुछ हो जाता है, तो परिवार को बीमा राशि + fund value दोनों मिलती हैं। यही ULIP को अलग बनाता है।

एक और आम भ्रम यह है कि ULIP में पैसा short-term में बढ़ जाएगा। असल में, ULIP का फायदा लंबी अवधि में देखने को मिलता है। सिर्फ 1–2 साल में इसकी fund value देखकर plan को बेकार समझना गलत है।

अगर आप सही fund चुनते हैं, समय-समय पर review करते हैं और लंबे समय तक निवेश करते हैं, तो ULIP अच्छा return दे सकता है। बस जरूरत है कि आप इसे short-term नजरिए से न देखें और disciplined रहकर निवेश करें।

ULIP और म्यूचुअल फंड – कौन किसके लिए बेहतर है

ULIP और म्यूचुअल फंड दोनों अच्छे investment options हैं, लेकिन ये हर किसी के लिए अलग तरीके से काम करते हैं। ULIP उन लोगों के लिए बेहतर है जिन्हें निवेश के साथ बीमा सुरक्षा भी चाहिए और जो लंबे समय तक disciplined निवेश कर सकते हैं। इसमें आपका पैसा market में invest होता है और साथ में परिवार को सुरक्षा भी मिलती है।

म्यूचुअल फंड उन लोगों के लिए अच्छा है जिनके पास पहले से life insurance है और जो सिर्फ अपनी संपत्ति बढ़ाना चाहते हैं। इसमें flexibility ज्यादा होती है और अगर आप market risk को सह सकते हैं, तो लंबे समय में अच्छा return भी मिल सकता है।

कुछ smart investors दोनों का combination भी इस्तेमाल करते हैं। मतलब एक हिस्सा ULIP में निवेश करते हैं ताकि सुरक्षा भी मिले और दूसरा हिस्सा म्यूचुअल फंड में ताकि संपत्ति बढ़े। यह तरीका लंबी अवधि में फायदा और सुरक्षा दोनों देता है।

सही निवेश वही है जो आपके goal, समय और जोखिम लेने की क्षमता के हिसाब से हो। इसलिए blindly किसी एक option को चुनने की बजाय अपनी जरूरत और लक्ष्य को समझकर निर्णय लेना हमेशा बेहतर रहता है।

ULIP और म्यूचुअल फंड – टैक्स बेनेफिट्स

ULIP में सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें टैक्स की बचत भी होती है। अगर आप Section 80C के तहत निवेश करते हैं, तो ULIP में दिया गया प्रीमियम टैक्स से छूट देता है। यानी जो पैसा आपने निवेश किया, उसका एक हिस्सा आप टैक्स में बचा सकते हैं। साथ ही, maturity पर मिलने वाली राशि भी Section 10(10D) के तहत टैक्स-फ्री होती है।

म्यूचुअल फंड में भी टैक्स बेनेफिट्स मिलते हैं, लेकिन ये अलग तरह के होते हैं। अगर आप ELSS (Equity Linked Saving Scheme) में निवेश करते हैं, तो Section 80C के तहत टैक्स में छूट मिलती है। लेकिन सिर्फ normal equity mutual fund में निवेश करने से 80C का लाभ नहीं मिलता।

एक और बात – ULIP लंबी अवधि का निवेश होता है, इसलिए इसमें मिलने वाले return पर लंबी अवधि की टैक्स छूट भी मिलती है। म्यूचुअल फंड में, अगर आप long-term hold करते हैं (1 साल से अधिक equity और 3 साल से अधिक debt), तो capital gains पर कम टैक्स देना पड़ता है।

तो सरल शब्दों में, दोनों में टैक्स बेनेफिट है, लेकिन ULIP में बीमा + निवेश + टैक्स बचत एक साथ मिलती है, जबकि म्यूचुअल फंड में सिर्फ investment और कुछ specific plans में टैक्स बचत मिलती है। यह भी एक बड़ा कारण है कि कई लोग ULIP को लंबी अवधि के लिए चुनते हैं।

ULIP में Lock-in Period – म्यूचुअल फंड से क्या अलग है?

ULIP में एक खास बात यह है कि इसमें lock-in period होता है। मतलब जो पैसा आपने निवेश किया है, उसे कम से कम 5 साल तक निकालना नहीं होता। यह नियम इसलिए है ताकि निवेश लंबी अवधि में रहे और आपको सही फायदा मिल सके। शुरुआत के 5 साल में अगर आप पैसा निकालते हैं, तो charges ज्यादा लग सकते हैं और fund value कम दिख सकती है।

म्यूचुअल फंड में ऐसा कोई lock-in period नहीं होता। आप SIP या lump sum से जमा किया पैसा चाहें तो किसी भी समय निकाल सकते हैं। यही flexibility म्यूचुअल फंड को short-term और emergency के लिए आसान बनाती है।

ULIP का lock-in period थोड़ा डराता जरूर है, लेकिन इसका फायदा यह है कि आप निवेश को discipline के साथ लंबे समय तक hold करते हैं। लंबी अवधि में यह lock-in period आपको बेहतर return और stability भी देता है।

सार यह है कि ULIP में security और long-term planning के लिए lock-in है, जबकि म्यूचुअल फंड में flexibility ज्यादा है। इसलिए यह देखना जरूरी है कि आपका investment goal short-term है या long-term, और उसी हिसाब से विकल्प चुनें।

ULIP में agent support – म्यूचुअल फंड से क्यों अलग है

बहुत लोग आजकल म्यूचुअल फंड online ही खोलते हैं। पैसा invest तो हो जाता है, लेकिन घर में कोई physical document नहीं होता। कई बार family को यह भी पता नहीं होता कि निवेशक ने fund में पैसा लगाया है। अगर अचानक निवेशक की मृत्यु हो जाए, तो पैसे निकालना मुश्किल हो जाता है। Nominee को online forms, PAN verification और branch office की लंबी process से गुजरना पड़ता है। कई बार fund claim करने में महीनों लग सकते हैं।

ULIP में यह समस्या नहीं होती। जब आप policy खरीदते हैं, तो आपको सारे hard copy documents घर पर मिलते हैं और company की nearest branch office में trained officer भी available रहता है। Policyholder की मृत्यु के बाद nominee सीधे officer या agent से बात करके claim process complete कर सकता है। इससे पैसे जल्दी और आसानी से मिल जाते हैं।

एक और बड़ी बात यह है कि ULIP में आपको insurance agent भी मिलता है। Agent सिर्फ policy बेचने के लिए नहीं होता, बल्कि आपको fund selection, future review और claim process में guide भी करता है। Family या nominee को किसी confusion या problem का सामना करना पड़े, तो agent help करता है। यह one-to-one communication म्यूचुअल फंड में नहीं मिलता, क्योंकि वहां सब online होता है और कोई physical support मौजूद नहीं होता।

इसका मतलब यह है कि ULIP सिर्फ पैसे बढ़ाने का investment नहीं है। यह family की सुरक्षा, आसान claim process और guidance भी देता है। Investment करते समय सिर्फ return देखना ही पर्याप्त नहीं है। यह भी देखना चाहिए कि मेरे जाने के बाद मेरा family आसानी से पैसा निकाल पाए। यही वजह है कि long-term और family security के लिए ULIP म्यूचुअल फंड से बेहतर विकल्प बनता है।

निष्कर्ष – सही निवेश कैसे चुनें

ULIP और म्यूचुअल फंड दोनों अच्छे investment options हैं, लेकिन सही विकल्प चुनना आपके goal, समय और जोखिम क्षमता पर depend करता है। अगर आप सिर्फ पैसे बढ़ाना चाहते हैं और पहले से life insurance है, तो म्यूचुअल फंड आपके लिए अच्छा है। इसमें flexibility ज्यादा है और छोटी-छोटी investment से भी शुरू किया जा सकता है।

लेकिन अगर आपका मकसद सिर्फ पैसे बढ़ाना नहीं, बल्कि family की सुरक्षा और long-term financial planning भी है, तो ULIP बेहतर विकल्प है। इसमें बीमा का cover, hard copy documents, branch office support और agent guidance जैसी सुविधाएं मिलती हैं। Policyholder की मृत्यु के बाद nominee आसानी से claim कर सकता है, जिससे family financially secure रहती है।

सिर्फ return देखकर निवेश करना सही नहीं है। यह देखना जरूरी है कि अगर आपके साथ कुछ हो जाए, तो आपका पैसा और मेहनत family तक आसानी से पहुँच सके। ULIP इस लिहाज से म्यूचुअल फंड से अलग और भरोसेमंद साबित होता है।

अंत में, smart investor वही है जो सिर्फ short-term return नहीं सोचता, बल्कि long-term benefits, सुरक्षा और guidance को भी ध्यान में रखकर निर्णय लेता है। यही सोच आपको सही निवेश चुनने में मदद करेगी और आपके पैसे और परिवार दोनों को सुरक्षित रखेगी।

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Suraj Barai

Suraj Barai is an IRDAI-authorised insurance advisor with LIC of India, and also an agent of Niva Bupa and SBI General Insurance. This blog is written based on his real-world experience in the insurance industry. He is also a content creator, Udemy instructor, website founder, and author of Kindle eBooks, sharing practical insights on insurance and finance.facebookinstagramtwitteryoutubetelegram

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