जब भी किसी व्यक्ति से LIC पॉलिसी की बात होती है, तो बहुत बार सामने से यही जवाब आता है – “मुझे LIC पॉलिसी पसंद नहीं है”। यह बात सुनने में सीधी लगती है, लेकिन इसके पीछे की वजह ज़्यादातर साफ़ नहीं होती। कई बार व्यक्ति खुद भी नहीं जानता कि उसे LIC से नापसंदगी क्यों है, बस उसने कहीं सुना होता है या किसी और का experience सुन लिया होता है।
असल में, नापसंदगी तब पैदा होती है जब किसी चीज़ को बिना ठीक से समझे judge कर लिया जाए। LIC के साथ भी यही होता है। किसी ने कहा कि return कम है, किसी ने कहा पैसा फँस जाता है, तो हमने भी मान लिया कि LIC बेकार है। लेकिन क्या कभी हमने खुद बैठकर यह समझने की कोशिश की कि LIC policy का असली उद्देश्य क्या है?
अक्सर लोग LIC को investment product मानकर देखते हैं, जबकि LIC का core काम life protection + long-term saving है। जब expectation investment जैसी होती है और product insurance वाला होता है, तब disappointment होना natural है। यहीं से “मुझे LIC पसंद नहीं है” जैसी feeling जन्म लेती है।
“LIC में रिटर्न कम है” – यह सोच कैसे बन गई?
आज के समय में social media और YouTube पर हर जगह mutual fund, stock market और crypto की बातें हो रही हैं। हर दूसरा वीडियो यही दिखाता है कि कैसे पैसा जल्दी double या triple किया जा सकता है। ऐसे माहौल में जब कोई LIC policy का return देखता है, तो उसे naturally कम लगता है।
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| Image credit: India Today |
लेकिन यहाँ एक बहुत बड़ी बात ignore कर दी जाती है – risk। Market-based products में return ज़्यादा दिखता है, लेकिन guarantee नहीं होती। आज market ऊपर है तो profit अच्छा दिखेगा, कल नीचे गया तो वही पैसा घट भी सकता है। LIC में return थोड़ा कम जरूर होता है, लेकिन वह stable और predictable होता है।
LIC policy का मतलब overnight rich बनना नहीं, बल्कि धीरे-धीरे wealth बनाना और साथ में life cover देना है। यही वजह है कि LIC को compare करते समय सिर्फ percentage नहीं, बल्कि security, guarantee और peace of mind को भी देखना चाहिए। जब ये बातें समझ में आती हैं, तब “return कम है” वाली सोच अपने आप हल्की पड़ने लगती है।
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“LIC agent बस policy बेचता है” – पूरी सच्चाई नहीं
कई लोगों का experience ऐसा रहा है कि agent policy बेचकर गायब हो गया। premium date याद नहीं दिलाई, maturity पर guidance नहीं दी, और जरूरत के समय phone भी नहीं उठाया। ऐसे experience के बाद किसी का LIC से dislike होना बिल्कुल समझ में आता है।
लेकिन यहाँ problem LIC नहीं, बल्कि गलत agent selection है। LIC में agent system इसलिए है ताकि customer को long-term support मिल सके। एक अच्छा agent सिर्फ policy नहीं बेचता, बल्कि policy के पूरे life cycle में साथ रहता है।
Death claim, maturity claim, loan apply, revival करना, nominee change – ये सब चीज़ें आसान नहीं होतीं। ऐसे समय पर अगर कोई experienced agent साथ खड़ा हो, तो family को बहुत बड़ा सहारा मिलता है। Online products में ये human support नहीं मिलती, और यही LIC की सबसे बड़ी strength है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
अगर LIC पसंद नहीं है, तो असल problem कहाँ है?
जब client से detail में बात की जाती है, तो धीरे-धीरे सच्चाई सामने आती है। कोई कहता है policy समझ में नहीं आई, कोई कहता है जरूरत के हिसाब से plan नहीं दिया गया, और कोई कहता है agent ने सिर्फ फायदे बताए, limitations नहीं।
यानी issue LIC policy से नहीं, बल्कि mis-selling या half information से है। हर LIC policy हर इंसान के लिए नहीं होती। किसी के लिए term plan सही है, किसी के लिए pension, किसी के लिए endowment या ULIP।
जब बिना proper financial planning के policy ली जाती है, तो बाद में dissatisfaction होना तय है। इसलिए LIC को reject करने से पहले यह देखना ज़रूरी है कि problem product में है या planning में।
LIC किसके लिए सही है और किसके लिए नहीं?
LIC उन लोगों के लिए ज्यादा suitable है जो financial life में stability चाहते हैं। जो लोग चाहते हैं कि चाहे कुछ भी हो जाए, family financially secure रहे, उनके लिए LIC एक मजबूत pillar बनता है। Guarantee, long-term saving और insurance cover – ये सब एक साथ मिलना आसान नहीं है।
वहीं, अगर कोई व्यक्ति high risk लेने में comfortable है और short-term में बड़ा return चाहता है, तो market-linked products भी सही हो सकते हैं। लेकिन यहाँ भी एक बात समझनी ज़रूरी है – insurance और investment का role अलग होता है।
Smart financial planning में LIC और mutual fund एक-दूसरे के enemy नहीं, बल्कि partner होते हैं। LIC protection देता है, mutual fund growth देता है। जब दोनों balance में होते हैं, तब financial life मजबूत बनती है।
आख़िरी बात – नापसंदगी से पहले समझ ज़रूरी है
“मुझे LIC पॉलिसी पसंद नहीं है” कहना आसान है, लेकिन सही फैसला तभी होता है जब पूरा picture समझा जाए। LIC कोई shortcut नहीं है, लेकिन ये लाखों परिवारों के लिए safety net जरूर है।
आज जो लोग LIC को ignore कर रहे हैं, उन्हीं में से कई लोग बाद में regret भी करते हैं, खासकर तब जब life में कोई unexpected situation आती है। LIC perfect नहीं है, लेकिन बिना समझे उसे reject करना भी सही नहीं।
Final decision आपका है, लेकिन decision knowledge के साथ लीजिए, assumption के साथ नहीं।
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